आज फिर शामिल होगा गोल्डन ऐरोज 17 स्क्वाड्रन, दुश्मनों का करेगा सफाया…

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भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी गोलडन ऐरोज 17 स्क्वाड्रन को मंगलवार से दोबारा शुरू करने जा रही है. ये राफेल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली ईकाई होगी. IAF से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने मीडिया को बतायाकि IAF चीफ बीएस धनोआ आज अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर एक कार्यक्रम में 17 स्क्वाड्रन को दोबारा शुरू करेंगे. माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक या अक्टूबर के पहले हफ्ते में राफेल मिल सकता है. भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी गोलडन ऐरोज 17 स्क्वाड्रन को मंगलवार से दोबारा शुरू करने जा रही है. ये राफेल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली ईकाई होगी. IAF से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने मीडिया को बताया कि IAF चीफ बीएस धनोआ आज अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर एक कार्यक्रम में 17 स्क्वाड्रन को दोबारा शुरू करेंगे. माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक या अक्टूबर के पहले हफ्ते में राफेल मिल सकता है. वहीं वायुसेना (IAF) ने राफेल विमानों का स्वागत करने के लिए जरूरी ढांचा तैयार कर लिया है. वहीं पायलटों को ट्रेनिंग दिए जाने समेत सभी अन्य औपचारिक तैयारियां भी पूरी कर ली हैं. गोलडन ऐरोज की बात करें तो 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वायुसेना (IAF) प्रमुख बीएस धनोआ ने गोलडन ऐरोज 17 स्क्वाड्रन की कमान संभाली थी. बठिंडा एयरबेस से इसे संचालित किया जाता था. मगर किन्हीं कारणों से 2016 में इसका संचालन बंद कर दिया था. भारतीय वायुसेना (IAF) ने रूस में निर्मित मिग 21 विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाना शुरू किया था. वहीं अब तीन सालों बाद इसे दोबारा शुरू किया जा रहा है. ये है इसका इतिहास स्क्वाड्रन की बात करें तो इसकी स्थापना 1951 में हुई थी. शुरूआत में इसने हैविलैंड वैंपायर एफ एमके 52 लड़ाकू विमानों की उड़ानों को संचालित किया था. अंबाला आएगी पहले खेप माना जा रहा है कि विमान का पहला दस्ता अंबाला स्थित एयर फोर्स स्टेशन में तैनात किया जाएगा. अंबाला एयर फोर्स स्टेशन को भारतीय वायुसेना (IAF) के महत्वपूर्ण स्टेशनों में शुमार किया जाता है. यहां से भारत-पाक सीमा की दूरी 220 किलोमीटर शेष रहती है. शेयर करेंLike this:Like Loading…