केन्द्रीय कृषि मंत्री से अपील- देशी गोवंश की खाद और कीटनाशक को सब्सिडी मिले- RK Sinha

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नई दिल्ली, 11 अगस्त. संसद के वर्षाकालीन सत्र में भारतीय जनता पार्टी के सांसद आरके सिन्हा ने अनेक जनहित के मुद्दे उठाए. विशेष तौर पर बच्चों में बढ़ते नशीले पदार्थों के सेवन, ईवीएम के नाम पर देश को बदनाम करने में जुटी कुछ शक्तियों के बारे में उन्होंने विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में मुद्दा उठाया. इसी के साथ किसानों की समस्या के साथ ही गोवंश के संरक्षण पर भी उन्होंने पुरजोर तरीके से अपनी बात रखी. राज्यसभा सदस्य और .. के अध्यक्ष आरके सिन्हा ने सत्र समाप्ति के तुरंत बाद केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री को एक पत्र लिखकर संसद में किए गए निर्णयों के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के कुछ बिन्दुओं पर विचार करने का आग्रह किया है. नरेन्द्र सिंह तोमर को लिखे गए पत्र में सांसद सिन्हा ने किसानों को किफायती उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कैबेनिट द्वारा सब्सिडी के प्रावधान का स्वागत करते हुए कहा है कि गोवंश के गोमय (गोबर) और गोमूत्र से बनने वाली खाद और कीटनाशकों पर भी सब्सिडी दी जानी चाहिए. आरके सिन्हा ने केन्द्रीय कृषि मंत्री से मांग की है कि पूर्णतः जैविक उर्वरक, डिसइंट्रीगेटर विधि से निर्मित कम्पोस्ट, जैविक कम्पोस्ट, और बर्मी कम्पोस्ट आदि के निर्माण पर भी सब्सिडी दी जानी चाहिए. इसके साथ ही पद्मश्री डा0 सुभाष पालेकर द्वारा विकसित जीरो बजट पद्धति पर निर्मित जीवामृत्र को भी सब्सिडी मिलनी चाहिए. उल्लेखनीय है कि जीवामृत देशी गाय के गोबर, गोमूत्र, चने के बेसन, गुड़ एवं पीपल, बरगद या बांस के नीचे की मिट्टी तथा ताजे मट्ठे को पानी में मिलाकर बनाया जाने वाला एक तरल उर्वरक है. सांसद आरके सिन्हा पिछले काफी समय से विषाक्त भोजन और विषाक्त दूध के खिलाफ जन जागरण अभियान चला रहे हैं. वे बताते हैं कि विदेशी नस्ल से हाईब्रिड जर्सी, फ्रीजियन, होलीस्टीन आदि गायों में ’’बीटामारफीन’’ नाम का रसायन पाया जाता है जो कि अति विषैला और जीवन के लिए घातक होता है. विदेशी नस्ल की गाय के दूध ही नहीं, घी भी धमनियों में जम जाता है और लोग हृदय रोग से पीड़ित होते हैं और इलाज पर करोड़ों-करोड़ रुपया खर्च हो रहा है. इसके मुकाबले वे ए-2 गुणवत्ता युक्त देशी गायों का दूध अपनाए जाने पर जोर देते हैं. केन्द्रीय कृषि मंत्री को लिखे पत्र में सांसद सिन्हा ने इस बातों को रेखांकित करते हुए कहा है कि रासायनिक उर्वरकों के समान ही देशी गोवंश के गोबर और गोमूत्र से बने उर्वरकों पर सब्सिडी मिलने लगेगी तब सभी तबके के गरीब किसानों की रूचि में भारी बदलाव आएगा और गावों में करोड़ों की संख्या में देशी गोपालन होने लगेगा. इससे किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और बच्चों सहित सभी नागरिकों को जहरमुक्त पौष्टिक दूध भी मिलेगा. इससे भारत सरकार की देशी गोपालन के विकास और संवर्धन की नीति की वृद्धि में अपार जनसहयोग भी प्राप्त होगा. ../जितेन्द्र तिवारी शेयर करेंLike this:Like Loading…