Home देश गन कैरिज पर क्यों ले जाया जा रहा अरुण जेटली का पार्थिव शरीर

गन कैरिज पर क्यों ले जाया जा रहा अरुण जेटली का पार्थिव शरीर

0
गन कैरिज पर क्यों ले जाया जा रहा अरुण जेटली का पार्थिव शरीर

[ad_1]

देश के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली के पार्थिव शरीर को निगम बोध घाट ले जाया गया है. जेटली की देह को गन कैरिज से अंतिम सफर पर ले जाया गया. इस गन कैरिज में कांच का फ्रेम लगाया गया है. इस फ्रेम के अंदर जेटली का पार्थिव शरीर रखा गया है, ताकि अंतिम यात्रा के दौरान उनके दर्शन कर सकें. पूर्व रक्षा मंत्री का पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटा गया है. इससे पहले 6 अगस्त को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हुआ था. मगर उनके पार्थिव शरीर को गन कैरिज से नहीं जे जाया गया था. दोनों केंद्रीय मंत्रियों के अंतिम सफर में ये अलग एक बात अलग थी. Gun Carriage, Former Defence Minister, Arun Jaitley, जेटली को क्यों मिली गन कैरिज दरअसल सिर्फ प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रपति के पार्थिव देह को ही गन कैरिड से ले जाने का नियम है. इनके अलावा ये सम्मान किसी दूसरे बड़े नेता को नहीं दिया जाता. वहीं अरूण जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रक्षा मंत्री के पद पर रहे थे. इस कारण उन्हें ये सम्मान दिया गया है. वहीं शनिवार को जेटली के निधन के बाद आज निगम बोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ. अंतिम संस्कार से पहले जेटली का पार्थिव शरीर उनके घर से बीजेपी मुख्यालय तक गन कैरिज यानी एक सैन्य वाहन में लाया गया. जैसे ही जेटली के घर से उनकी अंतिम यात्रा निकली वैसे ही सैंकड़ों समर्थक उनके काफिले के साथ जुड़े और बीजेपी मुख्यालय तक अरूण जेटली के लिए नारे लगाते रहे. सबसे पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निधन पर उनकी शवयात्रा गन कैरिज पर निकाली गई थी. ब्रिटेन में शुरू हुई परंपरा पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के दौरान गन कैरिज में लेकर जाने की शुरूआत ब्रिटेन ने की थी. 19वीं सदी में ब्रिटेन में क्वीन विक्टोरिया की शवयात्रा के दौरान इस परंपरा की शुरूआत की गई थी. क्वीन विक्टोरिया की अंतिम यात्रा को तब घोड़ों ने खिंचा था. बाद में इस सम्मान को सैनिकों ने पूरा किया था. महात्मा गांधी की शवयात्रा में भी सैनिकों ने ही कैरिज को खींचा था. शेयर करेंLike this:Like Loading…

[ad_2]