‘चमकी’ बुखार से पीड़ितों की तात्कालिक जरूरतों को मुहैया करना निहायत जरूरी: आरके सिन्हा

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बीजेपी के राज्यसभा सांसद एवं .. के अध्यक्ष आरके सिन्हा ने ‘चमकी’ बुखार से बच्चों की मौत को दुखद बताया. ‘चमकी’ से पीड़ित बच्चों का हालचाल लेने, वे खुद मुजफ्फरपुर के SKMC हॉस्पिटल गए थे. और पीड़ित परिजनों से मुलाकात भी की थी. इतना ही नहीं उन्होंने भर्ती बच्चों के खाने-पीने का सामान सहित अस्पताल के लिए चादर और बिस्तर भी मुहैया करवाया. पीड़ित बच्चों से मिलकर पटना वापस आए आरके सिन्हा ने रविवार को  कहा कि अस्पताल की अभी जो हालत है उसे देखते हुए वहां इस समय तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने का वक्त है.  उन्होंने कहा कि बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं, उनके लिए पानी ,बिस्किट ओआरएस का घोल जैसे चीजों की व्यवस्था करना निहायत जरूरी है. इसके लिए उन्होंने एक ट्रक में पहले ही दिल्ली से पीने का पानी, बिस्किट,ओआरएस के  पैकेट,ग्लूकोन-डी और कुछ बेड भेजवाए थे.  उन्होंने मुजफ्फरपुर जाकर वहां के सुपरिटेंडेंट और डॉक्टरों से मुलाकात की. और हालात का जायजा लिया.   चमकी बुखार को पुराना बताते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि चमकी से संबंधित जांच की बात 2014 में भी उठी थी, और एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट 2016 मे आ गई थी.  उन्होंने बताया कि इस कमेटी में मुजफ्फरपुर, दिल्ली के एम्स और मुंबई के डॉक्टर शामिल थे. टीम ने इस बात की पुष्टि की थी कि यह बुखार कच्ची लीची खाने की वजह से हो सकती है, क्योंकि कच्ची लीची में एक तरह का केमिकल होता है जो बहुत तेज गति से शरीर के शुगर लेवल को कम कर देता है. इसका प्रभाव बच्चों पर बहुत जल्द देखा जाता है. जांच रिपोर्ट की रोशनी में ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका.  उन्होंने कहा कि अभी माहौल यह है की बच्चों को कैसे जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए. इस पर ध्यान दिया जा रहा है.  SKMC हॉस्पिटल के चिकित्सकों के काम से संतुष्ट सांसद सिन्हा ने कहा कि वहां के डॉक्टर बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं, वे जल्द से जल्द बच्चों को ठीक करने में सक्रिय हैं, लेकिन उनके अनुसार उन्हीं बच्चों की मौत हुई जो गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे. अस्पताल परिसर में लोगों की ओर से लगातार की जा रही नारेबाजी पर उन्होंने कहा कि ऐसा करने से बच्चे ठीक नहीं हो जाएंगे. सबको साथ लेकर चलना होता है. डॉक्टर अपनी ओर से पूरी ताकत लगाए हुए हैं.  बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री अपनी ओर से बच्चों को बचाने के लिए डॉक्टरों को लगाए हुए हैं और अस्पताल की कुव्यवस्था को भी दूर करने की कोशिश की जा रही है.  ../आलोक शेयर करें