परमाणु निरत्रीकरण वार्ता फिर से शुरू करने के लिए राजी हुए ट्रंप और किम

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को उत्तर कोरियाई धरती पर कदम रखा और वहां के शासक किम जोंग से हाथ मिलाया. इसके बाद बैठक में दोनों नेता परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता फिर से शुरू करने पर राजी हुए. इस तरह का कूटनीतिक तमाशा पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने किया है. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, टंप ने पहले गैर सैन्य क्षेत्र में प्रवेश किया और फिर दो चार कदम चलकर उत्तर कोरिया की सीमा में प्रवेश कर किम जोंग उन से हाथ मिलाया. इसके बाद दोनों नेता दक्षिण कोरियाई क्षेत्र में लौट आए और बंद कमरे में करब एक घंटे तक बातचीत की. बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “ वार्ता अच्छी हुई. परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने के लिए दोनों पक्ष विस्तृत खाका तैयार करने पर राजी हुए हैं. हमें देखना होगा कि क्या हो सकता है.” उन्होंने आगे कहा के कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार से मुक्त करने के उद्देश्य से वार्ता शुरू करने के लिए दोनों देश टीम तैयार करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि समझौता को लेकर उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं है. गैर सैन्य क्षेत्र दो ढाई किलोमीटर चौड़ा और 250 किलोमीटर लंबा है जो उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को बांटता है. दक्षिण कोरियाई क्षेत्र में लौटने के बाद दोनों नेताओं ने तस्वीरें भी खिंचवाई. इस दौरान दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे इन भी उनके बीच शामिल हो गए. ट्रंप ने कहा, “ दुनिया के लिए आज महत्वपूर्ण दिन है और मेरे लिए सम्मान की बात है कि मैं यहां हूं. कई बड़ी चीजें हो रही हैं. “ गैर सैन्य क्षेत्र में यह अनियोजित बैठक ट्रंप की ओर से ट्विटर पर निमंत्रण देने के बाद हुई है. वाशिंगटन और प्योंगयांग वार्ता फिर से शुरू के लिए तैयार हुए हैं. दरअसल परमाणु आयुध मुद्दा पर दोनों देशों के बीच हनोई शिखर बैठक के विफल होने के बाद गतिरोध बना हुआ था. ट्रंप ने इससे पहले कहा था, “ दोनों नेता केवल एक दूसरे से हाथ मिलाएंगे और हेलो कहेंगे. वियतनाम में हनोई शिखर बैठक के बाद हमने एक दूसरे को देखा नहीं है.“ हालांकि हनोई शिखर बैठक के बाद से प्योंगयांग और वाशिंगटन के बीच संपर्क नहीं हुआ था, लेकिन दोनों देशों के नेता एक दूसरे को पत्र व्यवहार करते रहे हैं. दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बार मुलकात हुई है. पहली शिखर बैठक सिंगापुर में हुई. दूसरी बैठक हनोई में थी. जहां कूटनीतिक विश्लेषकों का सवाल है तो वे रेखांकित मुद्दों पर प्रगति को लेकर अब भी सशंकित हैं. ../ कृष्ण शेयर करें