स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने किया नेत्र कुम्भ प्रदर्शनी का उद्घाटन

0
60



ऋषिकेश सक्षम, नेशनल मेडिकोज आर्गेनाईजेशन, सर गंगाराम कोलमेट अस्पताल एवं द हंस फाउन्डेशन एवं अन्य संस्थााओं नेे दिल्ली के मानेकशा सेंटर मेें नेत्र कुम्भ अभिनन्दन समारोह आयोजित किया. सोमवार को कार्यक्रम में नेत्र कुम्भ में सहयोग करने वाली संस्थाओं और विभूतियों का अभिनन्दन किया. सभी विशिष्ट अतिथियों ने नेत्र रोग के प्रति जागरुकता के लिए लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया. इस अवसर पर स्मारिका का विमोचन हुआ. इसमें परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द ने, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाॅ. हर्ष वर्धन ने भी कार्यक्रम में प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं इस अवसर पर स्मारिका का विमोचन हुआ. स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इस अवसर पर कहा कि उन्होंने भी नेेत्र दान करने केे लिए संकल्प पत्र भर दिया है। नेत्र दान और नेत्र सेवा सबसे बड़ी सेवा है. भारत बहुत बड़ी आबादी वाला राष्ट्र है. दुनिया के तीन नेत्रहीन लोगों में भारत का एक व्यक्ति है. आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 15 मिलियन लोग नेत्रहीन हैं और 52 मिलियन से अधिक लोग नेत्ररोगों से पीड़ित हैं. यह गम्भीर चितंन का विषय है. पायलट प्रोजेक्ट की तरह लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करके दूसरों के जीवन में उजाला लाया जा सकता है. स्वामी ने कहा कि, प्रत्येक मनुष्य के भीतर ईश्वर का अंश है और मानव सेवा ही ईश्वर सेेवा है. सेवा से ही सृजन का आरम्भ होता है. सेवा अर्थात अपने अन्दर समाहित प्रकाश से दूसरों को प्रकाशित करना। दूसरों की पीड़ा का निवारण करना और नेत्रदान करके तो हम वास्तव में दूसरों के जीवन में प्रकाश का संचार कर रहे हैंं. दूसरों की पीड़ा का निवारण करने के लिए दयालु हृदय की आवश्यकता होती है. स्वामी ने सभी चिकित्सकोेेें और संस्थाओं का आह्वान करए हुए कहा कि अपनी सजृनशीलता को सेवा कार्यों में लगाएं. नेत्र दान के लिए आगे आएं और अपने रहते अपनी आंखों से संसार देखे तथा जाने के बाद भी आंखे दान कर दूसरों को भी वह सुख प्रदान करेंं. स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने सभी को जीते-जीते रक्तदान और जाते-जाते नेत्रदान का संकल्प दिलाया.
.. /विक्रम शेयर करें