होली: बाजार से चीनी सामान गायब, देशी पिचकारी और मोदी मुखौटे छाए

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मेरठ, 03 मार्च (हि.स.). कोरोना वायरस के प्रकोप से चीनी बाजार पूरी तरह से चौपट हो चुका है. हर बार होली पर भारत में छाया रहने वाला चीनी माल गायब है. इसकी जगह भारत में ही बनी देशी पिचकारी ने ले ली है. होली पर इस बार भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुखौटों की धूम मची हुई है. भारत में होली प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है. होली समेत प्रत्येक त्योहार में छाया रहने वाले चीनी आइटम इस बार बाजार से गायब है. इसकी वजह कोरोना वायरस का प्रकोप है. चीनी पिचकारी और रंग बाजार में नहीं आने के कारण देशी कारोबारियों की पौ-बारह हो गई है. मेरठ में बाजार देशी पिचकारी व अन्य सामान से सजे हुए हैं. भारतीय पिचकारी, गुलाल, रंग, रंग-बिरंगे पानी के टैंक बाजार में भरे हुए हैं. मेरठ में लाला का बाजार, वैली बाजार, सेंटल मार्किट, सदर बाजार आदि स्थानों पर चीनी सामान की बजाय होली के देशी आइटम्स की धूम मची है. पीएम मोदी के मुखौटे की धूम मची भारतीय सामान के साथ-साथ होली पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुखौटे भी धूम मचाए हुए हैं. दुकानों पर होली पर पहनने के लिए मोदी मुखौटे खूब बिक रहे हैं. वैली बाजार के दुकानदार विजय तनेजा ने बताया कि इस बार लोग देशी पिचकारी, रंग, गुलाल खरीद रहे हैं. इसके साथ-साथ पीएम मोदी के मुखौटे की भी अच्छी-खासी डिमांड है. शहर से लेकर देहात तक के लोग मोदी मुखौटे खरीदकर ले जा रहे हैं. पुराना चीनी मिल निकाल रहे चीन से होली पर नया सामान नहीं आने के कारण दुकानदार पिछले साल का पुराना माल निकाल रहे हैं. दुकानों पर पिछले साल का बचा हुआ चीनी माल बेचा जा रहा है. पुराना माल भी दोगुने दाम पर बेचा जा रहा है. दुकानदारों का कहना है कि नया माल नहीं आने के बाद भी लोगों की चीनी माल की डिमांड आ रही है. इस कारण पिछले साल का पुराना सामान भी अच्छे दामों पर बिक रहा है. देशी आइटम्स की भी बाजार में भरमार है और उसे भी खरीदा जा रहा है. कान्हा जी के होली सामान की भी भरमार होली पर चीन का माल बाजार से गायब होने के कारण भारतीय सामान ने मजबूत पकड़ बना ली है. होली पर कान्हा जी की ड्रेस और छोटी-छोटी पिचकारी बाजार में आ गई है. छोटी बाल्टी और पिचकारी की बाजार में सबसे ज्यादा डिमांड है. कंकरखेड़ा के कान्हा पोशाक सेंटर के संचालक विजय मान ने बताया कि होली पर कान्हा की ड्रेस, बाल्टी वाली पिचकारी की बहुत मांग है. यह माल भारत में ही मथुरा, वृंदावन के कारीगरों ने तैयार किया है. हर्बल कलर की मांग बढ़ी पिछले कुछ वर्षों में रसायनिक रंग बाजार में छाये हुए थे, लेकिन इस बार हर्बल कलर की मांग बढ़ रही है. सेंट्रल मार्किट के होली सामान के विक्रेता नितिन बताते हैं कि हर्बल गुलाल और हर्बल रंग की मांग तेजी से बढ़ी है. देहात और शहर के दुकानदार भी हर्बल कलर खूब बेच रहे हैं. अभी से ही हर्बल रंगों की मांग तेजी से बढ़ गई है. ../कुलदीप/राजेश Like this:Like Loading… Related