धार्मिक

इस मंदिर की झील में रहता है मगरमच्छ खाता है प्रसाद, किस्मत वालों को देता है दर्शन

कभी-कभी दुनिया में कुछ चीज़ें ऐसी होती है जिन्हें देखकर हम ये नहीं सोच पाते की इस पर यकीन करें या ना करें। उन चीज़ों को सोचकर सच में चमत्कार की अनुभूति होती है। ऐसी ही एक घटना केरल के अनंतपुर की है। कहा जाता है की यहां अनंतपुर के कासरगोड में एक अनोखा मंदिर है, यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। झील के बीचों-बीच बने इस मंदिर में आकर्षक का केंद्र यहां झील में रहने वाला एक मगरमच्छ है। लोगों का मानना है की यह मगरमच्छ लोगों का भाग्य चमका देता है, इसे देखने के लिए भक्तों की नज़रें झील में टिकी रहती है। लोक मान्यताओं की अनुसार ये मगरमच्छ इस मंदिर में वर्ष 1945 से रह रहा है और यह मंदिर की पहरेदारी करता है। आज तक इसने किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मगरमच्छ का नाम बबिया बताया जाता है। यह शाकाहारी मगरमच्छ यहां पिछले 60 साल से रह रहा है। किवदंतियों के अनुसार यहां जैसे ही...

बजरंगबली की प्रतिमा के आगे करे ये उपाय पैसों की तंगी से मिलेगा छुटकारा

आर्थिक तंगी से परेशान व्यक्ति हर संभव प्रयास करता है। वह मेहनत से पैसा कमाने के साथ-साथ ज्योतिष व अन्य पंडितों द्वारा बताए गए उपाय करने का प्रयास करता है। लेकिन यदि आपको मेहनत करने के बाद भी व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो तो इसका एक कारण वास्तुदोष भी होता है। कभी-कभी घर में वास्तुदोष होने के कारण भी कड़ी मेहनत का उचित व सार्थक परिणाम प्राप्त नहीं होता। इसलिए घर में वास्तुदोष दूर करने के लिए उपाय किए जाएं तो व्यक्ति की सभी समस्याएं आसानी से दूर हो सकती है। आइए जानते हैं व्यक्ति किन-किन उपायों से वास्तुदोष दूर कर सकता है 1. घर में भगवान वास्तु, धन कुबेर और माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी होनी चाहिए और नित्य इनकी पूजा की जानी चाहिए। इससे व्यक्ति को आर्थित तंगी नहीं झेलनी पड़ती है। 2. घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर लगाकर प्रतिदिन उसकी पूजा...

बसंत पंचमी 2019 : ऐसे करें मां सरस्वती को करें प्रसन्न

Religion / धर्म बसंत पंचमी 10 फरवरी को है। हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इसलिए इसे माघ पंचमी भी कहा जाता है। इसके अलावा बसंत पंचमी को वसंत पंचमी, सरस्वती पंचमी और श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल बसंत ऋतु में पेड़ पौधों में नई कोंपलें निकलती है। इस मौस में कई तरह के फूल खिलते हैं और इसी मौसम में खेतों में पीली सरसों की चादर छा जाती है।  बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है।  मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी माना जाता है।  1. बसंत पंचमी के दिन कोई उपवास नहीं होता, केवल पूजा होती है। 2. इस दिन पीले वस्त्र पहनने, हल्दी का तिलक लगाकर, मीठे चावल बना कर पूजा करने का विधान है। 3. विद्यार्थियों, संगीतकार, कलाकारों के लिये यह विशेष महत्व का दिन है। उन्हे अपनी पुस्तकों, वाद्यों आदि की अवश्य पूजा करन...

12 वर्ष के अंतराल पर ही क्यों लगता है कुंभ मेला?

Religion / धर्म दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले कुंभ का आगाज होने वाला है। पौष मास की पूर्णिमा व मकर संक्रांति पर्व से प्रारंभ हो रहा जो विशेष महत्व रखता है। हिन्दू पौराणिक मान्यताओ के अनुसार जो भी इस पावन अवसर पर कुंभ स्नान करता है तो अमृतयुक्त त्रिवेणी जल से उसके सारे पाप नष्ट हो जाते है और आत्मा की शुद्धि हों उसे मोक्ष प्रदान होता है। कुंभ का पर्व हर 12 वर्ष के अंतराल पर चारों में से किसी एक पवित्र नदी के तट पर मनाया जाता है। हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और प्रयागराज में त्रिवेणी संगम जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है। क्या है कुंभ का इतिहास- कुंभ मेले की पौराणिक मान्यता अमृत मंथन से जुड़ी हुई है। देवताओं और राक्षसों से यह निर्णय किया था कि समुद्र के मंथन तथा उसके द्वारा प्रकट होने वाले सभी रत्नों को आपस में बांटा जाएगा। समुद्र के मंथन द्वारा जो सबसे मूल...

नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का शहीदी पर्व 12 दिसंबर को  

धर्म, Dharm ।  ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का शहीदी पर्व 12 दिसंबर को बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार से मनाया जा रहा है।  दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत आज शाम को 7:00 बजे रहिरास साहब जी के पाठ से हुई। इसके पश्चात श्री दरबार साहिब अमृतसर से आए रागी भाई दविंदर सिंह जी एवं रागी भाई जुझार सिंह जी ने संगतों को शबद कीर्तन द्वारा निहाल किया। इसके पश्चात कथा वाचक ज्ञानी रंजीत सिंह गोहर ने गुरु महाराज की शहादत पर प्रकाश डालेगें । गुरु तेग बहादर साहिब जी ने बिहार, बंगाल, आसाम, उड़ीसा, बंगलादेष, उत्तर प्रदेश  आदि प्रान्तों की यात्रा की। श्री गुरू तेग बहादुर साहिब जी आसाम से वापस अनन्दपुर साहब (पंजाब) जाते वक्त बनारस अयोध्या  के रास्ते लखनऊ में सन 1670ई0 में  इस ऐतिहासिक  गुरूद्वारा श्री गुरू तेग बहादर साहिब जी, यहियागंज लखनऊ...

अगहन मास में श्रीकृष्ण देगे आशीर्वाद होगा सभी समस्याओ का अंत करे ये ख़ास उपाय  

धर्म, Dharm  माह में भगवान श्री कृष्ण का पूजन करने वालों के सब क्लेश दूर हो जाते हैं। दुख-दरिद्रता से उद्धार होता है। जिन परिवारों में कलह-क्लेश के कारण अशांति का वातावरण हो, वहां घर के लोग मार्गशीर्ष माह में इन मंत्रों का अधिकाधिक जप करें I   दुख या क्लेश के निवारण के लिए श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए 11 बार निम्नलिखित मंत्र का जप एकाग्रचित्त होकर करना चाहिए   संपत्ति प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन पढ़ें यह मंत्र ।     इस मंत्र का नित्य जप करते हुए श्रीकृष्ण की आराधना करें। इससे परिवार में खुशियां वापस लौट आएंगी।   जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा हो या प्रेम विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें शीघ्र मनपसंद विवाह के लिए श्रीकृष्ण के इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए-   जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो रहा हो या विवाह में विलंब हो रहा हो, उन कन्याओं को श्रीकृष्ण जैसे सुंदर पति की प्राप्ति के लिए माता...

साईं बाबा को चांद मिया के नाम से भी जाना जाता है    

धर्म, Dharm    के वरोधी उन्हें चांद मियां कहते है।  उनके मुताबिक वे एक मुस्लिम थे, और किसी भी हिन्दू को किसी भी मुस्लिम की पूजा नहीं करनी चाहिए। आइये हम बताते है कि चांद मिया आखिर थे कौन ? सांईं बाबा का जन्म महाराष्ट्र के परभणी जिले के पाथरी गांव में हुआ था। सांईं की माँ का नाम देवकी अम्मा और  पिता का नाम गोविंद भाऊ है। कुछ लोग उनके पिता का नाम गंगाभाऊ बताते हैं और माता का नाम देवगिरि अम्मा। गोविंद भाऊ और देवकी अम्मा के पांच पुत्र थे। पहला पुत्र रघुपत भुसारी, दूसरा दादा भुसारी, तीसरा हरिबाबू भुसारी, चौथा अम्बादास भुसारी और पांचवें बालवंत भुसारी थे। सांईं बाबा गोविंद भाऊ और देवकी अम्मा के तीसरे नंबर के पुत्र थे। उनका नाम हरिबाबू भुसारी था। साईं बाबा के माता-पिता के घर के पास ही एक मुस्लिम परिवार रहता था। उस परिवार के मुखिया का नाम चांद मिया था और उनकी पत्नी चांद बी थी। उन्हें कोई संतान नहीं...

प्यार को पाने के लिए करें यें  खास उपाय  

धर्म, Dharm  कमजोर शुक्र ग्रह को ऐसे करें  मजबूत, कीजिये ये उपाय    लोगों को ये महसूस होता है कि लोग उनको इग्नोर कर रहे हैं, वो  समझ नहीं पाते कि अपने आप को कैसे पेश करना है। अच्छा बर्ताव करने के बावजूद भी आपकी तरफ कोई आकर्षित क्यों नहीं हो रहा है। आइये जानते हैं, क्यों लोग आपसे प्यार नहीं करते।  दरअसल, आपका शुक्र ग्रह कमजोर है। केवल कुछ उपायों को करके आप अपना प्यार पा सकते है।    प्रेम और आकर्षण का है। यदि हम शुक्र का ये मंत्र नियमित रूप से करते है :- शुक्र मंत्र :  

जाने क्यों नहीं करते भद्रा काल में मंगल कार्यों की शुरुआत    

धर्म, Dharm    के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनि की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी तेज तर्रार  बताया गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टि करण में स्थान दिया। किसी भी मांगलिक कार्य में भद्रा योग का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि भद्रा काल में मंगल-उत्सव की शुरुआत या समाप्ति अशुभ मानी जाती है अत: भद्रा काल की अशुभता को मानकर कोई भी आस्थावान व्यक्ति शुभ कार्य नहीं करता। इसलिए जानते हैं कि आखिर क्या होती है भद्रा? और क्यों इसे अशुभ माना जाता है? हिन्दू पंचांग के 5 प्रमुख अंग होते हैं। ये हैं- तिथि, वार, योग, नक्षत्र और करण। इनमें करण एक महत्वपूर्ण अंग होता है। यह तिथि का आधा भाग होता है। करण की संख्या 11 होती है। ये चर और अचर में बांटे गए हैं। चर या गतिशील करण में बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज...

जानिए क्यों काल भैरव ने काट दिया था ब्रह्मा का सिर? 

धर्म की खबरें/ religion News   कालभैरव भगवान शंकर के रुद्र अवतार माने जाते हैं। काशी से भैरव बाबा का संबंध बहुत ही खास होने के कारण यहां का उनको कोतवाल भी कहा जाता है। 29 नवंबर को बाबा काल भैरव की जयंती है। उनका जन्म मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। मान्यता है कि जिस किसी को भी काशी में रहना है, बाबा भैरव की आज्ञा लेना होता है। बिना उनकी आज्ञा के यहां कोई नहीं रह सकता। उनकी शक्ति का जितना बखान किया जाए कम है। उन्होंने एक बार श्रृष्टि के रचयिता ब्रह्म देव का सिर काट दिया था। इस घटना से स्वर्ग लोग में हड़कंप मच गया था। ब्रह्मा जी का शीष काट देने के कारण भैरव को ब्रह्म हत्या का पाप लगा था।       काशी नगरी का राज भगवान विश्वनाथ को माना जाता है। वहीं, भैरव बाबा को यहां का कोतवाल कहते हैं। भगवान विश्वनाथ का दर्शन तभी सफल होता है, जब पहले ही आप बाबा भैरव का अशीर्वाद प्राप्त ...

जाने कौन से अचूक उपाय से होगें आप के ग्रह प्रसन्न  

धर्म, Dharm    लगता है कि आपका कोई ग्रह आपकी जिंदगी में मुसीबत खड़ी कर रहा है तो आप खुशबू से इन ग्रहों  के बुरे प्रभाव को दूर कर सकते हैं। तो जानिए कि कैसे खुशबू से ग्रहों की शांति की जा सकती है।  – यदि आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह बुरे प्रभाव दे रहा है तो आप केसर या गुलाब की खुशबू का उपयोग करें। घर के लिए होम फ्रेशनर लाएं और शरीर के लिए इस खुशबू    का कोई इत्र उपयोग करें।  – चंद्रमा मन का कारण है अत: इसके लिए चमेली और रातरानी के इत्र का उपयोग कर सकते हैं।  – मंगल ग्रह की परेशानी से मुक्त होने के लिए लाल चंदन का इत्र, तेल अथवा खुशबू का उपयोग कर सकते हैं। – बुध ग्रह की शांति के लिए चंपा का इत्र तथा तेल का प्रयोग बुध की दृष्टि से उत्तम है।  – केसर और केवड़े का इत्र के उपयोग के अलावा पीले फूलों की खुशबू से गुरु की कृपा पाई जा सकती है। – शुक्र को सुधारने के लिए...

जानिए क्यों धरती पर देवता मनाने आते हैं दीवाली?

धर्म के समाचार/News of religion   हिन्दू धर्म में दीवाली त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का अंत करने के बाद माता सीता को लेकर अयोध्या पहुंचे थे। भगवान राम के अयोध्या पहुंचने पर यहां के लोगों ने घरों में दीपक जलाकर पूरी नगरी में रोशनी की थी। इस दिन माता लक्ष्मी भी घरों में पूजा पाठ का माहौल देखने आती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि स्वर्ग से देवता भी दीवाली का त्योहार मनाने के लिए धरती पर आते हैं। बताते चलें कि दीवाली त्योहार के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्वर्ग से देवता गंगा नदी के किनारे आते हैं। यहां सभी देवता दीवाली मनाते हैं। इसलिए इस दिन को देव दीपवली के नाम से भी जाना जाता है। देव दीपावली के दिन गंगा के घाटों और कुंडों की साफ-0सफाई की जाती है और किनारों पर दीया जलाया जाता है।      देव दीपावली का पर्व मनाने के लिए बनारस का विश...

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