Emergency पर पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee ने जेल से लिखीं कई कविताएं…

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26 जून 1975, ये वो दिन था जो भारतीय इतिहास में काले दिन के रूप दर्ज हो गया. दरअसल इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने देश पर आपातकाल (Emergency) थोपा था. आपातकाल के दौरान विपक्ष के कई नेताओं को जेल में ठूंस दिया गया था. आपातकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) को भी जेल में डाल दिया गया था. अटल जी ने आपातकाल पर जेल में कई कविताएं लिखीं. संघ पर प्रतिबंध के बाद वाजपेयी ने जेल में एक कविता लिखी… अनुशासन के नाम पर, अनुशासन का ख़ून, भंग कर दिया संघ को, कैसा चढ़ा जुनून कैसा चढ़ा जुनून, मातृपूजा प्रतिबंधित, कुलटा करती केशव-कुल की कीर्ति कलंकित। कह कैदी कविराय तोड़ कानूनी कारा, गूंजेगा भारतमाता की जय का नारा। वाजपेयी जब जेल में थे तब उनका लिखना-पढ़ना चलता रहा, जेल की एक रात पर वाजपेयी ने लिखा… बेचैनी की रात, प्रातः नहीं सुहाता, घिरी घटा घनघोर, ना कोई पंछी गाता, तन भारी, मन खिन्न, जागता दर्द पुराना, सब अपने में मस्त, पराया कष्ट ना जाना, कह कैदी कविराय, बुरे दिन आने वाले, रह लेंगे जैसा, रखेंगे ऊपर वाले। अपनी जेल डायरी के एक पन्ने में वाजपेयी ने लिखा… कोठरी सूनी, वेदना दूनी, झींगुरों का स्वर, बेधता अंतर, बंद है आकाश, घुट रहा निःश्वास। चाटुकार नेताओं पर व्यंग करते हुए वाजपेयी ने लिखा था… सिंह के सपूतों को सीखचों में बंद कर, संसद भवन में स्यार हुआ-हुआ करते हैं। चाटुकार चमचों की चांदी चमाचम चमकी, निष्कलंक निडर नवाए सर फिरते हैं। निर्लज्ज निर्दयी निशाने पर निशाने साध, व्याघ्र के समान विहगों के प्राण हरते हैं। लोक लाज छोड़ लोक लाज का गला मरोड़, अनुशासन रटते पर शासन पर मरते हैं। साभार- वरिष्ठ पत्रकार ‘विजय त्रिवेदी’ की किताब ‘हार नहीं मानूंगा’ से कुछ अंश… शेयर करें