RSS स्थापना दिवस : जानें कैसे हुई इसकी स्थापना…

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आज आरएसएस यानी की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है. आज आरएसएस का 94वां स्थापना दिवस है. 2025 में इसके 100 साल भी पूरे हो जाएंगे. इस मौके पर ये समझना भी महत्वपूर्ण है कि आखिर संघ की स्थापना कैसे-कब हुई थी. किस तरह ये संगठन स्थापना के दशकों बाद भी संगठन के तौर पर खुद को स्थापित किए हुए है. दुनिया का सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना केशव बलराम हेडगेवार ने 1925 में की थी. नागपुर के अखाड़ों से तैयार हुआ आज का मौजूदा संघ अपने आप में विराट रूप ले चुका है. 25 से भी कम लोगों ने की शुरूआत संघ की शुरूआत आजादी से भी पहले की है. इसकी शुरूआत प्रथम सरसंघचालक हेडगेवार ने की थी. उन्होंने अपने घर पर 17 लोगों के साथ इसकी शुरूआत की. सबसे पहले एक बैठक में संघ के गठन की योजना बनी. इसमें हेडगेवार के साथ विश्वनाथ केलकर, भाऊजी कावरे, अण्णा साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी आदि शामिल रहे. इसके बाद कई बैठकों में तय हुआ की असल में संघ का नाम क्या और कैसे रखा जाए. इसके जरिए क्या काम होंगे. जब इस संघ की स्थापना का मकसद हिंदुओं को संगठित करने का था. ऐसे हुआ नामकरण संघ को इसका वर्तमान नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी 17 अप्रैल 1926 को मिला था. इस दिन ही हेडगेवार को पहला संघ प्रमुख चुना गया. मगर सरसंघचालक का पद उन्हें 1929 में मिला. वैसे आरएसएस के नाम का अस्तित्व भी काफी सोच विचार और मंथन के बाद सामने आया था. शुरूआत में आरएसएस, जरीपटका मंडल और भारतोद्वारक मंडल जैसे नाम सामने आए. मगर अंत में वोटिंग के बाद आरएसएस नाम पर मुहर लगी. देश के कोने कोने में शाखाएं नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे प्रार्थना के साथ शाखा की शुरूआत हुई. बीते कई दशकों से देश भर में ये शाखाएं लग रही हैं. हेडगेवार ने कई व्यायामशालाएं और अखाड़ों के जरिए संघ कार्य को आगे बढ़ाया. दरअसल उन्होंने स्वस्थ स्वयंसेवक की कल्पना की थी. अपनी इसी कल्पना को उन्होंने आगे बढ़ाया. शेयर करेंLike this:Like Loading…